Sunday, October 25, 2020

असली चोर कौन...??? हिंन्दी निबंध

असली चोर कौन...???


शहर से दो मील पर नदी किनारे हरे-भरे वृक्षो वाले एकलव्य आश्रम कि मनमोहिनी छटा सचमुच देखते ही बनती थी. दूर दूर तक एकांत और शांत वातावरण था.


आश्रम मे केवल उन्ही बच्चो को प्रवेश दिया जाता जो हर दृष्टी से योग्य होते थे. गुरु हरिप्रसाद जी आश्रम के सचालक थे, जिनका बच्चे बहुत सम्मान करते थे. वह आश्रम के परिसर मे बने निवास मे ही रहते और वहा कि व्यवस्था का पूरा ध्यान रखते थे. उनकी धर्मपत्नी मधुलता एक विदुषी पविव्रता स्त्री थी. उनका इकलौता पुत्र सौरभ बहुत सुशील और होनहार था...!!!




आश्रम मे कुल पच्चीस छात्र थे. जिनमे उनका पुत्र भी शामिल था. जयंत उन सबका मानिटर था. वह एक निर्धन परिवार से था. उसका पिता सेठ शोभाराम कि दुकान पर मजदूरी करके अपने परिवार का पेट पाला करता था. सेठजी के लड्के विक्रम ने इसी आश्रम मे प्रवेश ले रखा था. लेकिन उसमे एक कमी थी कि वह जयंत को सदा तिरस्कार कि दृष्टि से देखा करता था.


एक रोज विक्रम ने गुरुजी से कहा कि उसकी जेब से किसी ने चादी का सिक्का चुरा लिया पूछने पर उसने बताया कि उसका शक जयंत पर है.


गुरुजी जयंत पर बहुत स्नेह रखते थे. यही नही, उसे वह अपना सबसे अधिक विश्वासपात्र शिष्य भी समझते थे. उसका नाम सुनकर गुरुजी को बहुत पीडा हुई जो उन्हे अंदर ही अंदर सालने लगी. जब इस बारे मे जयंत समेत सभी बालको से पूछा गया तो उन्होने कहा कि उन्हे कुछ पता नही है.


गुरुजी इसके कारण परेशान रहने लगे. आज तक उनके आश्रम मे ऐसी सुखद घटना पहले कभी नही हुई थी.


आखिर उन्हे एक तरकीब सूझी. शाम को भोजन के बाद उन्होने सभी को बुलाकर कहा देखो बच्चो विक्रम कि जेब से इस तरह सिक्के कि चोरी हो जाना इस आश्रम कि प्रतिष्ठा पर गहरी चोट है. यह तो मानना हे पडेगा कि जिसने यह हरकत कि है, वह कोई बाहर का नही है, बल्की हम मे से ही कोई है. खैर जाने अनजाने मे जिससे भी यह गलती हुई है, उससे मेरा यही कहना है कि वह तुरंत अपनी गलती सुधारे औए सुबह होने से पहले पहले उस सिक्के को आश्रम कि पत्र मंजूषा मे डाल दे. यदि ऐसा नही हुआ तो बहुत कष्ट होगा. इस रिथति मे सिक्के के कीमत मुझे अपनी ओर से अदा करनी होगी...


गुरुजी के इस कथन पर एकदम सन्नाटा छा गया. सोने से पहले बालको मे काफी देर तक इसी बात कि चर्चा होती रही. उनका ह्रदय बार बार कचोट रहा था. कि गुरुजी ने इस घटना से दुखी होकर यदि आश्रम छोड दिया,तो उन सबके लिए वह डूब मरने जैसी बात होगी.

गुरुजी भी देर रात तक सो नही पाए. दूसरी ओर चारपाई पर लेटे सौरभ की नजरे पिता पर लगी हुई थी. वह भी बहुत दुखी था. कुछ देर के बाद जब सौरभ ने देखा कि पिताजी सो रहे है, तो वह चुपके से उठा और बिना किसी आहट के धीरे से बाहर निकल गया.


गुरुजी सचमुच सोए नही थे. बल्कि आखे मीचकर लेटे हुए थे. बेटे का इस तरह बाहर जाना उन्हे कुछ अजीब लगा. पर उस समय वह कुछ बोले नही.


सुबह जब पत्र मंजूषा खोली गई, तो उसमे वह सिक्का मिल गया. गुरुजी समझ गए कि यह घिनौना कार्य उनके ही बेटे सौरभ ने किया है. सुबह दुखी होकर उन्होने सभी छात्रो से कहा कि उन्हे इस बात कि खुशी है कि विक्रम का सिक्का उसे मिल गया, किंतु ऐसी ओछी हरकत करने वाला उनसे छिपा नही रह सका. वह उसे अच्छी तरह जान गए है. फिर भी चूकि उसने अपनी गलती स्वीकार कर ली है. इसलिए आश्रम से निकालने के बजाए, वह केवल उसे तीन दिन लगातार निराहार रहने कि सजा सुनाते है.

सभी बालक एक दूसरे का मुह ताकने लगे. विक्रम पीछे के ओर शांत खडा था. जयंत के चेहरे पर उदासी छाई हुई थी. सौरभ का सिर नीचे ओर झुका था.


गुरुजी कुछ देर रुककर फिर बोले, अब आप सभी यह जानना चाहेगे कि इस दंड का भागी कौन है.???

तो सुनिए !!! दोषी मेरा अपना बेटा सौरभ है.


यह सुनते ही विक्रम जोर से चिल्लाया नही-नही यह पाप सौरभ से नही, मुझसे हुआ है. दौडकर वह गुरुजी के चरणो मे गिर गया, और गिडगिडाते हुए बोला....मुझे माफ कर दो गुरुजी, मुझे माफ कर दो..

सौरभ का इसमे कोई दोष नही है. वह सिक्का किसी ने नही चुराया. इसे मैंने ही सौरभ को रखने के लिए दिया था. मैंने इसे कसम दिलाई थी कि इस बारे मे वह किसी को कुछ नही बताएगा. इसीलिए वह इतने दिन चुप रहा.


तो फिर जयंत पर चोरी का झूठा इल्जाम क्यो लगाया.???

इसके पीछे तेरा क्या मकसद था. गुरुजी ने पूछा...


जयंत से मन ही मन मुझे ईष्र्या होने लगी थी. क्योकि वह मेरी बराबरी कर रहा है. इसलिए मै इसे अपमानित करके किसी तरह आश्रम से निकलवा देना चाहता था. सौरभ ने इस बात के लिए मुझे कोसा भी, लेकिन मै अपने अहंकार मे अकडा रहा. आज मुझे मालूम हुआ कि किसी कि पहचान उसके पैसो से नही, गुणो से होती है.


कहता हुआ वह फूट- फूटकर रोने लगा.


गुरुजी को लगा, विक्रम ने अपनी भूल स्वीकार करके आश्रम को अपवित्र होने से बचा लिया है. उन्होने उसे प्यार से गले लगा लिया.


मै आशा, करता हुं आप को यह पोस्ट बहुत पसंद आया होगा. बेल बटन को जरुर दबाये... 

Sunday, September 27, 2020

वास्तु शास्त्र दिलाएगा धन समृध्दि

वास्तु शास्त्र दिलाएगा धन समृध्दि


यू तो किसी को किस्मत से ज्यादा नही मिलता लेकिन कई बार अनेक बाधाओ के कारण किस्मत मे लिखी धन समृध्दि भी प्राप्त नही होती.

वास्तु को मानने वाले अगर इसके मुताबिक काम करे तो उन्हे वो मिल सकता है जो अब तक नही मिला है...


                                                       वास्तु शास्त्र दिलाएगा धन समृध्दि


पूर्व दिशा- यहा घर कि संपति और तिजोरी रखना शुभ होता है और उसमे बढोतरी होती रहती है.


पश्चिम दिशा- यहा धन सम्पति और आभूषण रखे जाए तो साधारण ही शुभता का लाभ मिलता है. परंतु घर का मुखिया अपने स्त्री पुरुष मित्रो का सहयोग होने के बाद भी बडी कठिनाई के साथ घन कमा पाता है.


उत्तर दिशा- घर कि इस दिशा मे कैश व आभूषण जिस अलमारी मे रखते है वह अलमारी भवन कि उत्तर दिशा के कमरे मे दक्षिण कि दिवार से लगाकर रखना चाहिए. इस प्रकार रखने से अलमारी उत्तर दिशा कि ओर खुलेगी, उसमे रखे गए पैसे और आभूषण मे हमेशा वृध्दि होती रहेगी.


दक्षिण दिशा- इस दिशा मे धन, सोना,चांदी और आभूषण रखने से नुकसान तो नही होता परंतु बढोतरी भी विशेष नही होती है.


ईशान कोण- यहा पैसा, धन और आभूषण रखे जाए तो यह दर्शाता है कि घर का मुखिया बुध्दिमान है और यदि उत्तर ईशान मे रखे हो, तो घर के एक क्न्या संतान और यदि पूर्व ईशान मे रखे हो तो एक पुत्र संतान बहुत बुध्दिमान और प्रसिध्द होता है.


आग्नेय कोण- यहा धन रखने से धन घटता है, क्योकि घर के मुखिया कि आमदनी घर के खर्चे से कम होने के कारण कर्ज कि स्थिति बनी रहती है.


नैऋत्य कोण- यहा धन, महगा सामान और आभूषण रखे जाए तो वह टिकते जरुर है, किंतु एक बात अवश्य रहती है कि यह धन और सामान गलत ढंग से कमाया हुआ होता है.


वायव्य कोण- यहा धन रखा हो तो खर्च जितनी आमदनी जुटा पाना मुश्किल होता है. ऐसे व्यक्ति का बजट हमेशा गडबडाया रहता है और कर्जदारो से सताया जाता है.


सीढियो के नीचे तिजोरी रखना शुभ नही होता है. सीढियो या टायलेट के सामने भी तिजोरी नही रखना चाहिए. तिजोरी वाले कमरे मे काबाड या मकडी के जाले होने से नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है.

घर कि तिजोरी के पल्ले पर बैठी हुई लक्ष्मी जी कि तस्वीर जिसमे दो हाथी सूंड उठाए नजर आते है, लगाना बडा शुभ होता है. तिजोरी वाले कमरे का रंग क्रीम या आफ व्हाइट रखना चाहिए...



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Wednesday, September 16, 2020

हनुमानजी कि उपासना से मिलेगा रोजगार

 

हनुमानजी कि उपासना से मिलेगा रोजगार/ बेरोजगार 


योग्यता और अनुभव के अनिसार एक अच्छी नौकरी अथवा रोजगार कि अभिलाषा हर मनुष्य की होती है. इसके लिए वह प्रयास भी करता है. परंतु कई बार अथक प्रयासो के बावजूद भी अपेक्षित सफलता नही मिल पाती है.



हनुमानजी कि उपासना से मिलेगा रोजगार





इस स्थिति मे ईश्वर कि शरण मे जाकर प्रार्थना करके रोजगार के लिए प्रयास किये जाते है. किसी मनुष्य कि जन्म कुडली मे नौकरी का योग है, अथवा स्वरोजगार , इस बात की जानकारी कुडली के अध्ययन से की जा सकती है. वही तंत्र मंत्र शास्त्र मे दिए गए, उपायो को करके नौकरी अथवा रोजगार का सपना साकार किया जा सकता है. रोजगार प्राप्त करने के इच्छुक बेरोजगारो को प्रत्येक शनिवार के दिन मारुति नंदन हनुमानजी कि उपासना करके सुन्दरकाण्ड का पाठ अवश्य करना चाहिए. 


हनुमानजी के मंदिर मे शुध्द घी का दिपक जलाकर लाल चंदन अथवा मुंगा कि माला कि सहायता से एक सौ आठ बार कवन सो काज कठिन जग माही, जो नही होय तात तुम पाहीं मंत्र का जाप करना चाहिए.कार्य सिध्द होने पर शनिवार के दिन सवा किलो बूंदी के लड्डू का भोग लगाकर वितरित कर देना चाहिए. घर पर भी प्रतिदिन इस मंत्र का जाप करते रहने से शीघ्र फल कि प्राप्ति होती है. 


किसी नौकरी हेतु साक्षात्कार के लिए पूरी तैयारी करना बहुत आवश्यक है. साथ ही यदि उस दिन लाल चंदन कि माला से 11 बार श्री गणेशजी कि प्रतिमा अथवा चित्र के समक्ष “ ओउम वक्रंतुण्डाय हुं मंत्र का जाप करके शुध्द चित भाव से प्रार्थना कि जाये तो बेरोजगारी कि समस्या से छुटकारा मिल सकता है. श्री गणेशजी कि आराधना करते समय भगवान शिव, माता पार्वती और नंदी देव का ध्यान भी अवश्य करना चाहिए.

 

Wednesday, April 15, 2020

अकबर बीरबल | एक अनोखी कहानी


अकबर बीरबल | एक अनोखी कहानी




एक बार मुगल बादशाह अकबर और उनका अति प्रिय मंत्री बीरबल दोनो शतरंज खेलने बैठे. दोनो के बीच यह शर्त लगी कि उन मे से जो भी व्यक्ति शतरंज की बाजी हारेगा, उसे जीतने वाले कि इच्छा के अनुसार जुर्माना चुकाना होगा.




अकबर बीरबल एक अनोखी कहानी
अकबर बीरबल एक अनोखी कहानी





इसी क्रम मे पहले बीरबल बोला जहापनाह यदि आप जीत गए और मै हार गया तो हुकुम फरमाए कि मै आपको क्या जुर्माना चुकाऊगा ? बादशाह ने जवाब दिया बीरबल यदि यह बाजी मै जीता और तुम हारे तो तुम्हे, जुर्माना स्वरूप मुझे सौ स्वर्ण मुद्राए सौपनी होगी. इस पर बीरबल ने हा मे गर्दन हिलाई. अब बारी बीरबल कि थी, वह बोला जहापनाह, यदि इस बाजी मे आप हारे और मै जीता तो आप मुझे जुर्माना के रुप मे शतरंज के 64 खानो मे गेहू के दाने रखकर चुकाएगे.


लेकिन इसमे मेरी एक छोटी सी शर्त यह रहेगी, कि आपको शतरंज के पहले खाने मे गेहू का एक दाना रखना होगा, दूसरे खाने मे पहले के दुगने दो दाने, तीसरे खाने मे दो के दुगने चार दाने, चौथे खाने मे चार के दुगने आठ दाने, पाचवे खाने मे आठ के दुगने सोलह दाने....


ऐसे करते हुए शतरंज के सभी चौसठ खानो मे गेहू के दाने रख कर वे सारे गेहू के दाने जुर्माना स्वरुप मुझे सौप दे. बस यही मेरी शर्त है. बीरबल कि इस छोटी सी माग को सुनकर बादशाह अकबर ने जोरदार ठहाका लगाया, और बोला बीरबल मुझे तुम्हारी यह शर्त मंजूर है.


इसके बाद शतरंज का खेल शुरु हुआ. अब संयोग देखिए कि शतरंज कि उस बाजी मे बीरबल जीत गया और बादशाह अकबर को हार का मुह देखना पडा. अब बारी आई हारने वाले को जीतने वाले का जुर्माना चुकाने की. हारने वाले अकबर बादशाह ने बडे ही अहंकार के साथ अपने खजांची को हुकुम दिया, कि वह बीरबल को शर्त के अनुसार शतरंज के 64 खानो मे गेहू के दाने रख कर कुल दाने चुका दे.


बीरबल कि इस शर्त को पूरी करने के दौरन अकबर बादशाह का खजांची थोडी ही देर मे पसीने-पसीने हो गया. फिर वह अकबर बादशाह के सामने हाथ जोडकर खडा हो गया और बोला जहापनाह हम हुकूमत का सारा खजाना खाली कर ले, तो भी बीरबल कि इस शर्त को पूरी नही कर पाएगे. 

अकबर याने सुल्तान-ए-हिन्द को खजांची कि बात पर विश्वास नही हुआ. लेकिन जब खुद उसने 64 खानो कि जोड लगाई तो उसका मुह खुला का खुला रह गया.


आप भी शायद मेरी बात से इत्तेफाक नही रख रहे है. चलिए मै आपको समझाता हू. बीरबल की शर्त के अनुसार जहा शतरंज के पहले खाने मे गेहू का केवल एक दाना, दूसरे खाने मे दो दाने, तीसरे खाने मे चार दाने ऐसे रखे गये थे. वही शतरंज के सबसे आखिरी अकेले चौसठवे खाने मे गेहू के 9223372036854775808 दाने रखने पड रहे थे और एक से लगा कर चौसठ तक के सभी खानो मे रखे जाने वाले गेहू के कुल दानो कि संख्या हो रही है. 18446744073709551615 जिनका कुल वजन होता है. 1,19,90,00,00,000 मैट्रिक टन जो कि वर्ष 2019 के सम्पूर्ण विश्व के गेहू के उत्पादन से 1645 गुणा अधिक है.


साथियो, वृध्दि दो तरह की होती है. पहली संख्यात्मक वृध्दि और दूसरी होती है गुणात्मक वृध्दि. यदि शतरंज के चौसठ खानो मे क्रमश: 1, 2, 3.........62, 63, 64 कर के प्रत्येक खाने मे उसकी संख्या के अनुसार गेहू के दाने रखे जाते तो 64 खानो मे रखे गेहू के कुल दानो का योग होता मात्र 2080 दाने और यह कहलाती है संख्यात्मक वृध्दि जबकि बीरबल के द्वारा बताई गई गणना कहलाती है गुणात्मक वृध्दि. जहा संख्यात्मक वृध्दि मे 64 खानो का योग मात्र 2080 दाने होते है, वही गुणात्मक वृध्दि मे तो मात्र 11 खानो का योग ही 2047 दाने हो जाता है.





मै आशा करता हू, कि आप को मेरा यह पोस्ट पसंद आया होगा.

Tuesday, April 14, 2020

कोरोना वायरस - Lockdown extension

कोरोना वायरस - Lockdown extension


जिस तरह आप सभी जानते है, कि कोरोना वायरस से पूरे विश्व मे बहुत से लोग प्रभावित हुये है. इससे सभी को काफी नुकसान हुआ है. हर तरह से लोग प्रभावित हुए है. जैसे कि आर्थिक अवस्था आदि....

इस बीच भारत के श्रीमान प्रधानमंत्री जी ने लाक डाउन पूरे देश मे लगा दिये थे जो कि 14 दिन का था. अभी भी भारत मे कुछ मरीज कोरोना वायरस के मिल रहे है जिसे देख कर उसे कुछ दिनो के लिए और बढा दिया गया है.




कोरोना वायरस - Lockdown extension
कोरोना वायरस - Lockdown extension



मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता मे हुई उच्च- स्तरीय बैठक मे:-




प्रदेश सरकार ने यह तय किया---



1- सभी जिलो मे 30 अप्रैल 2020 तक लाकडाउन रहेगा. जिलो के दो वर्ग होगे. ए वर्ग मे वे जिले होगे जहा 14 अप्रैल 2020 तक एक भी कोरोना पाजिटिव केस नही मिला है. वर्ग बी मे वह जिले होगे जहा पाजिटिव केस मिल चुके है, या 14 अप्रैल तक और मिलने की आशका है.

ए वर्ग वाले जिलो मे कुछ रियायते दी जाएगी.
बी वर्ग वाले जिलो मे प्रतिबंध पूरी तरह से जारी रहेगा.

2- जिलो मे चिह्रित किए गय हाटपाट वाले क्षेत्रो मे किसी भी तरह का मूवमेट पूरी तरह से प्रतिबधित होगा. यहा प्रशासन राशन और अन्य जरुरी सामान की व्यवस्था करेगा.

3- 30 अप्रैल 2020 तक प्रदेश मे कही भी पाच से अधिक लोगो के जमा होने पर प्रतिबंध रहेगा और धारा 144 लागू रहेगी.

4- 31 मई 2020 तक पूरे प्रदेश मे सार्वजनिक स्थानो पर मास्क पहनना अनिवार्य होगा और सोशल डिस्टेसिग की नीति भी इसी तारीक तक लागू रहेगी.

5- वर्ग बी के जिलो की सीमाए सील रहेगी, और सामान का परिवहन भी जिलो की सीमा के अंदर नही होगा. वर्ग ए के जिलो मे जिलाधिकारी कि अनुमति से परिवहन मे रियायत दी जा सकती है. वर्ग ए और वर्ग बी वाले जिलो के बीच कोई आवागमन नही होगा. वर्तमान मे लागू पास मान्य होगे. स्वास्थ्य परीक्षण आदि जारी रहेगा.

6- हाटपाट वाले इलाको को छोडकर जोखिम का आकलन कर डीएम निर्माण, औघोगिक उत्पादन और खनन की अनुमति दे सकेगे.

7- स्टाप एवं रजिट्रेशन की सभी जिलो मे नियमो के अधीन अनुमति.
यह भी हुआ तय ये रहेगे बंद.

8- होटल, धर्मशाला, होम, स्टे, मॉल, सिनेमा हाल, मल्टीप्लेक्स, जिम, रेस्टूरेट, बार, धार्मिक सस्थान आदि बंद रहेगे. जिलाधिकारी की अनुमति के बिना किसी कार्मिक या अन्य व्यक्ति को हाटाया नही जाएगा.

9- हाटपाट को छोडकर इनको रहेगी अनुमति- खेती किसानी, बागवानी, मौन पालन, पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन, कटाई बुवाई आदि को अनुमति रहेगी. राज्य कि सीमा से बाहर और वर्ग बी वाले जिलो से श्रमिक नही लाए जा सकेगे.

10- 15 मई तक प्रदेश के सभी स्कूल, कॉलेज और अन्य शिक्षण संस्थान बंद रहेगे.

11- अस्पतालो आदि को छोडकर 15 मई तक प्रदेश मे एयर कंडिशनर के उपयोग पर भी रोक.

12- रियायत वर्ग ए वालो जिलो के बीच सात बजे से लेकर एक बजे के बीच खुद के वाहनो से यात्रा हो सकेगी. वर्ग ए और वर्ग बी वालो जिलो के बीच वाहन नही चलेगे, केवल आवश्यक सामान की ढुलाई हो सकेगी.

13- वर्ग ए वालो जिलो सहित अगर कही कोरोना संक्रमण के नए मामले सामने आते है, तो प्रतिबंद अधिक सख्त किए जाएगे.

14- क्वारंटीन होने वालो को इधर-उधर आने-जाने की इजाजत नही होगी.

15- सभी निजी अस्पताल और अन्य चिकित्सीय संस्थाए प्रदेश मे खुली रहेगी और सोशल डिस्टेस नीति का पालन होगा.

16- सोशल डिस्टेस का पालन करते हुए मनरेगा को वर्ग ए जिलो मे अनुमति होगी.








उत्तर प्रदेश के 75 मे से 47 जिले कोरोना मुक्त है...




सुरक्षित जिले ए वर्ग---

अंबेडकर नगर, अमेठी, अमरोहा, औरेय्या, अयोध्या, बहराइच, बलिया, बलरामपुर, बाराबंकी, भदोही, बिजनौर, बदायु, चंदौली, चित्रकुट, देवरिया, एटा, इटावा, फरुखाबाद, फतेहपुर, गोडा, गोरखपुर, हमीरपुर, जालौन, झासी, कन्नौज, कानपुर देहात, कासगंज, कौशाबी, कुशीनगर, ललितपुर, महोबा, मैंनपुरी, मथुरा, मऊ, मिर्जापुर, मुजफ्फरनगर, प्रयागराज, रायबरेली, रामपुर, सभल, संत कबीर नगर, श्रावस्ती , सिध्दार्थ नगर, सीतापुर, सोनभद्र, सुल्तानपुर, और उन्नाव.



संक्रमित जिले बी वर्ग---

अलीगढ, आगरा, आजमगढ, बागपत, बांदा, बरेली, बस्ती, बुलंदशहर, फिरोजाबाद, गौतम बुध्द नगर, गाजियाबाद, गाजीपुर, हरदोई, हापुड, हाथरस, जौनपुर, कानपुर, लखीमपुर खिरी, लखनऊ, महारज गंज, मेरठ, मुरादाबाद, पीलिभीत, प्रतापगढ, सहारनपुर, शाहजहापुर, शामली और वाराणसी.








मै आशा करता हू, कि आप को मेरा यह पोस्ट पसंद आया होगा. अपने दोस्तो मे इसे जरुर शेयर करे.धन्यवाद...!!!