बोलती टोपी हिन्दी निबंध
एक गरीब किसान अपनी बीमार माँ के साथ रहता था । उसका नाम
तोरोकू था । तोरोकू दिन भर खेत पर काम करता। फिर भी अपने और बीमार माँ के लिए खाना
न जुटा पाता था । इसलिए वह दूसरों के खेत मे भी मजदूरी करता और लोगों का बोझा ढोता
।
एक दिन बहुत तूफान तथा बारिश आने की आशंका थी । उसी दिन
तोरोकू को अपने गाव के बढ़ाई के घर से दूसरे ग़ाव के मुखिया के यहा एक बक्सा पहुचाना
था । मुखिया की बेटी की शादी थी । वह बक्सा उसी के लिए बनवाया गया था।
तोरोकू को बीमार माँ ने ऐसे मौसम मे घर से बाहर जाने से मना
किया, लेकिन उसने एक न मानी । उसकी जिद देखकर माँ ने उसे एक पुरानी टोपी निकालकर
देते हुए कहा – बेटा, यह तुम्हारे पिताजी की एकमात्र निशानी है। इसे पहनकर जाओ ।
शायद यह इस तूफान और बरसात मे तुम्हारी मदद कर सके।
तोरोकू ने उस टोपी को पहना और बक्सा को पीठ पर लादकर चल
दिया । रास्ते मे उसे थोड़ी थकान महसूस हुई । बक्से को पीठ से उतार, वह एक पेड़ के
नीचे सुस्ताने लगा । अचानक उसे किसी की बाते करने की आवाज सुनाई देने लगी ।
ये आवाजे कहा से आ रही है ? कोई दिखता क्यों नहीं ?
उसने चिल्लाकर कहा और झूझलाहट मे अपनी टोपी सिर से उतार दी
। अब उसे बाते सुनाई देना बंद हो गई । थोड़ी देर बाद जब तोरोकू ने फिर से टोपी
पहनी, तो उसे बाते फिर सुनाई देने लगी ।
कमाल है, टोपी पहनते ही मै चिड़िया, पेड़ों, नदी-पहाड़ों की
बाते सुन सकता हू और समझ भी सकता हू । सोचते हुए वह बक्सा पीठ पर लादकर मुखिया के
ग़ाव की ओर चल पड़ा ।
देखो, न तोरोकू जिस लड़की का बक्सा पहुचने जा रहा है, वह
बहुत दिनों से बीमार है । उसका पिता बहुत चितित है । उसके ब्याह की तारीख भी नजदीक
आ रही है । बहुत इलाज कराने के बाद भी उसकी हालत दिन पर दिन बिगड़ती ही जा रही है ।
एक चिड़िया बोली तोरोकू धीमी गति से चलता ध्यान से चिड़ियों की बाते सुनने लगा ।
हा, लेकिन मुखिया के बगीचे मे एक कपूर का पेड़ है । लड़की को
ठीक करने का इलाज इस कपूर के पेड़ के पास है । लेकिन पेड़ों की बाते भला मनुष्य कहा
समझ पायेगे ? दूसरी चिड़िया ने कहा ।
यह सुनकर तोरोकू के मुह से निकला मै, मै समझूगा ।
लेकिन, काश ! चिड़िया तोरोकू के उत्साह को समझ सकती । उन्हे
न तो मनुष्य की भाषा आती थी, और न ही उनके पास तोरोकू जैसी चमत्कारी टोपी थी । इस
तरह तोरोकू नदी, पहाड़, पेड़, चिड़ियों की बाते सुनता, मस्ती से मुखिया के घर पहुचा ।
तोरोकू ने मुखिया को बताया की अगर वह उसे एक दिन अपने घर ठहरने की इजाजत दे, तो वह
उसकी बेटी की बीमारी दूर कर सकता है ।
तोरोकू मुखिया के घर ठहरा और रात होने का बेताबी से इंतजार
करने लगा । आखिर रात को ही तो वह पेड़ों की बाते सुन सकता था । लोगों का ऐसा मानना
था, की आधी रात मे ही पेड़ आपस मे बाते करते है । तोरोकू पीछे के बगीचे मे कपूर के
पेड़ के पास जाकर अपनी टोपी पहनकर चुपचाप बैठ गया । कुछ देर बाद उसे लगा की पेड़ आपस
मे बाते कर रहे है। एक पेड़ बोला देखो हमारा दोस्त कपूर का पेड़ अब थोड़े ही दिनों मे
मर जाएगा ।
दूसरा बोला बेचारा दिन प्रतिदिन सूखता जा रहा है ।
जब से मुखिया ने पीछे की पहाड़ी पर बड़ा सा पत्थर लगाकर पानी
को रोका है, तब से ही यह हुआ है । तीसरा बोला ।।
चौथा पेड़ जो इतनी देर से चुपचाप सबकी बाते सुन रहा था, बोला-
अरे मुखिया बहुत धूर्त है । उसने सारा पानी धान के खेत मे डाल दिया है ।
वह मूर्ख यह नहीं
जानता की कपूर के पेड़ के सूखने की वजह से ही उसकी बेटी बीमार है । पाचवा बोला ?
हा, एक दिन कपूर के पेड़ की तरह हम भी सूखकर मर जायेगे ।
लेकिन हमारी कोई नहीं सुनेगा । कौन करेगा हमारी देखभाल ?
उनमे से एक बुजुर्ग पेड़ भारी स्वर मे गहरी सासे लेते हुए
बोला ।
तोरोकू जो इतनी देर से पेड़ों की बाते सुन रहा था , तुरंत
बोल पडा मै करउगा, मै करउगा तुम लोगों की देखभाल ।।
सुबह की लालिमा पूरब की पहाड़ी से छिटकने लगी थी । तोरोकू
उठकर पेड़ों की बताई गई पहाड़ी की तरफ चल पडा । वहा जाकर उसने देखा की सचमुच वहा पर
बड़ा सा पत्थर पानी को बगीचे मे जाने से रोक रहा था । तोरोकू पत्थर हटाने की कोशिश
करने लगा । लेकिन पत्थर इतना बड़ा था, की हिलने का नाम तक न लिया। तोरोकू अपनी ओर
से पूरा जोर लगाकर पत्थर को हटाने की कोशिश करता रहा ।
अबे मूर्ख, यह क्या कर रहा है ? इससे मेरे सारे खेत सूख
जायेगे । यह कहकर वह तोरोकू को वहा से हटाने लगा, परंतु तोरोकू कहा मानने वाला था
? जिद्दी तो वह था ही।
उसने पूरा जोर लगाया और पत्थर दूसरी ओर ढलान से लुढ़कता हुआ
दूर जा गिरा । बगीचे की तरफ पानी बहने लगा । पानी का बहाव इतना तेज था, की मुखिया
उसके साथ बगीचे तक बहता चला गया । मुखिया को काफी चोट आई ।
कुछ ही दिनों मे कपूर का पेड़ लहलहाने लगा, और उसके साथ के
पेड़ भी हरे भरे हो गए । कपूर के पेड़ की खुशबू वातावरण मे दूर-दूर तक फैलने लगी ।
मुखिया की बेटी भी ठीक हो गई । तोरोकू एक दिन अपनी माँ को घुमाते हुए वहा ले आया ।
हरियाली देखकर तोरोकू की माँ भी स्वस्थ होने लगी ।
मुकिया को इस बात की काफी खुशी थी, की तोरोकू की वजह से
उसकी बेटी स्वस्थ होकर अपने ससुराल जा चुकी थी । वह समझ चुका था की पानी की जरूरत
केवल फसल को नहीं बल्कि अन्य सभी को है । जरूरत थी और न ही बोझा ढोने की ।
उसने अपने लिए खेत खरीदे । ढेर सारे पेड़ लगाए । तोरोकू अब
दिन भर अपने खेत मे काम करता। जब थक जाता तो पेड़ों की छाया मे अपने पिता की
चमत्कारी बोलती टोपी पहन पेड़ों की, चिड़ियों की, नदी नालों की बाते सुनता । कहते
है, तोरोकू के ग़ाव मे फिर कभी पानी की कमी नहीं हुई ।
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