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| नवरात्री |
साल मे चार नवरात्र होते है,
जिसमें से दो गुप्त नवरात्र होते है. आमऔर पर लोग दो नवरात्रों के बारे मे जानते
हैं ! चैत्र या वासंतिक नवरात्र ! इसके अलावा दो और नवरात्र भी हैं. जिसमें विशेष
कामनाओं कि सिध्दी की जाती है. लेकिन चैत्र और आश्विन माह के नवरात्र ही ज्यादा लोकप्रिय
हैं. चैत्र नवरात्र का खास महत्त्व है. क्योकि इस महिने से शुभता और ऊर्जा का आंरभ होता है. ऐसे समय मे देवी
की पूजा कर उनसे सुख समृध्दि की कामना करना बहुत शुभ माना गया है.
नवरात्र पर देवी पूजन और नौ दिन के व्रत का बहुत महत्त्व है. मां दुर्गा के नौ
रुपों की आराधना का पावन पर्व शुरु होने वाला है. नवरात्र वह समय है, जब दोनो ऋतुओं का मिलन होता है. इस संधि
काल मे ब्रह्मांड से असीम शक्तियां ऊर्जा के
रुप मे हम तक पहुंचती है. चैत्र नवरात्री के दौरान एक उपवास का पालन करने से शरीर आगामी गर्मियों के मौसम के लिए तैयार होता है.
यह चैत्र शुक्ल पक्ष प्रथम से प्रारंभ होती है, और
रामनवमी को इसका समापन होता है. इस वर्ष चैत्र नवरात्र 6 अप्रैल से प्रारंभ
है, और समापन 14 अप्रैल को है. चैत्र नवरात्री के पहले तीन दिनों की ऊर्जा
मां दुर्गा को समर्पित है. अगले तीन दिन धन की देवी मां लक्ष्मी को समर्पित है. और
आखिर के तीन दिन ज्ञान की देवी मां सरस्वती को समर्पित है.
इस दिन से कलश स्थापना
कर भक्त मां के नौ स्वरुपो की पूजा करते है.
अबकी नवरात्र का आरंभ शनिवार से हो रहा है और समापन रविवार को. रामनवमी का त्योहार रविवार को मनाया जाएगा. वासंतिक नवरात्र
मे अष्टमी को रात्रि मे महिलाएं पूजन करती है. रामनवमी के दिन ही वैशाखी का पर्व भी
मनाया जाएगा.
देवी मंदिरो में नवरात्र
की तैयारी
वासंतिक नवरात्र को लेकर देवी मंदिरो मे साफ सफाई का सिलसिला शुरु हो गया है. परिसर
तथा पास के दुकानें सजने लगी है. कुछ दुकानो पर नारियल, चुनारी और पूजन सामग्री अभी से सज गई है. मंदिर की व्यवस्था से जुडे लोग भी हवन
पूजन को लेकर तैयारी कर रहे है.

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