फूलों वाली राजकुमारी
बहुत पुरानी बात है, किसी गाँव मे पति-पत्नी रहा करते थे. वे बहुत
भले थे. गाँव भर के दुख मे दुखी और सुख मे खुशी से झुम उठते थे.
वे दोनों छोटे से झोपडे मे रहते थे. आँगन के
आधे हिस्से को गोबर मिट्टी से लीप देते और आधे मे आलू, शकरकंद, मूंगफली और दूसरी सब्जिया उगाते. साल भर तक वे यू ही अपना
गुजारा कर लिया करते.
एक दिन की बात है, बहुत सवेरे तारोकी
छाँह मे पत्नी झोपडी से बाहर निकली. उसने देखा कि एक सफेद खूबसूरत बिल्ली कचनार के
पेड के तले दुबकी बैठी है. वृध्दा ने उसे पुचकारा तो वह उसके पांवो से लिपट गई.
पौ फटने पर वृध्दा पडोसी से दूध चावल ले आया. वृध्दा दम्पति ने कभी किसी के
सामने हाथ नही पसारा था, पर सुंदर बिल्ली के
लिये वे किसी न किसी तरह दूध का जुगाड करने लगे.
इसी तरह समय गुजरता गया. सर्दी-गर्मी,पतझड-वसंत
आ-आकर लौटने लगे. उन तीनों की खुशी का ठिकाना नही था, पर बिना काम धाम के कैसे चलता? बुढापे के कारण
दोनो को चलने फिरने मे भी कठिनाई होने लगी. बिल्ली भी भूखी रहने लगी. वह अपने
माता-पिता के कष्ट को देख नही सकती थी.
मैं भी जरा घर से बाहर खुली हवा मे हो आऊ. बिल्ली ने सोचा. गली के कुत्तो और
दूसरे जानवरो से बचती बचाती वह घने जंगल मे जा पहुँची. उसने झरने का ताजा जल पिया
और देखते ही देखते सुंदर कन्या मे बदल गई.
वह अपने माता-पिता के घर जा पहुँची.बोली मै आप की सेवा करुँगी. उन दोनो को कुछ
समझ मे नही आया. अपना पेट भरना मुश्किल हो गया है. अब इस तीसरे प्राणी का क्या
होगा? वे दोनो सोच ने डूब गए! बिल्ली
के एकाएक गायब हो जाने से भी वे परेशान थे.
वह कन्या जहँ-जहाँ जाती, आँगन मे फूल झरने
लगते. फूलों कि डलिया लिये वह बाजार जाती. फूल बेचकर पैसों से खाने पीने का सामान
खरीदती, और शाम को घर लौट
आती. इस तरह तीनों लोगो की दशा धीरे-धीरे सुधरने लगी. इतने सुंदर फूल गाँव भर मे
कही नही थे. मजे कि बात यह कि, बिना बीज-खाद-पानी
के फूलोंकि खेती हुआ करती थी.
“बेट, तू कौन है? कहाँ से आई है?” वृध्दा ने पुछा.
“मै बेटी हूँ आपकी. इससे ज्यादा कुछ जनिए भी मत.” वह जबाव दिया.
खाना खाकर वह अपने झोपडे मे घुसती तो सवेरे निकलती.
सवेरे के साथ ही रंग- बिरंगे खुशबूदार फूलों का सिलसिला शुरु हो जाता. उसने
माता-पिता से कह रखा था, कि असलियत जानने की
कोशिश न करे! पर उन्हे सब्र कहाँ?
एक बार आधी रात को उन दोनो ने सूराख से झोपडी मे झांका. उन्होने देखा कि लड्की
के स्थान पर वही सफेद बिल्ली औंधे मुँह पडी है. उनके देखने की देर थी, कि बिल्ली एक सुंदर राजकुमारी बन गई.
“आपने मेरा असली रुप देख लिया है, इसलिये अब मै अपने
फूलो के देश जाऊगी. मैं आपकी सहायता करने चुपके-चुपके यहाँ आई थी.”
उसके जाने की बात सुनकर माता-पिता फूट फूटकर रोने लगे. पर अब क्या हो सकता था.
चिंता न करे,
आपके आंग़न मे हमेशा रंग-बिरंगे फूल खिलते रहेंगे. आपकी सेवा का बदला नही चुका पाउगी मै.
आपके आंग़न मे हमेशा रंग-बिरंगे फूल खिलते रहेंगे. आपकी सेवा का बदला नही चुका पाउगी मै.
इतना कहते ही वह राजकुमारी तेज हवा के झोके के पर सवार होकर अपने देश चली गई.
वह गाँव ‘फूलोंवाला गाँव ‘ के नाम से जाना जाने लगा.

No comments:
Post a Comment
Please do not sent any spam comment in the box.