तुलसी के गुण
तुलसी के माहात्म्य का
वर्णन करना ऐसा है, जैसे सूरज को दीपक
दिखाना, या समुद्र किनारे बैठकर
लहरो को गिनना.
सर्व रोग निवारक जीवनीय
शक्ति ,इस औषधि को प्रत्यक्ष “देवी”
कहा गया है.क्योकि मनुष्य जाति के लिये यह बहुत ही सस्ती औषधि है, और कोई नही है. तुलसी के धार्मिक महत्व के
कारण हर-घर आगंन मे इसके पौधे लगाये जाते है. तुलसी की कई जातियां मिलती है, जिनमे श्वेत कृष्ण प्रमुख है.
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| tulsi |
बीज गोलाकार, चिकना तथा भूरे एवं काले रंग के होते है, शीत काल मे पुष्प तथा फल आते है.
औषधीय उपयोग
शक्ति के लिये: 20 ग्राम तुलसी बीज तथा 40 ग्राम मिश्री मिलाकर बारीक पीसकर
1 ग्राम की मात्रा मे शीत काल मे कुछ दिन सेवन करने से कफ रोगों मे बचाव होता है, और कमजोरी दुर होती है.
दंत रोग: काली मिर्च और तुलसी के
पत्तो की गोली बनाकर दांत के नीचे रखने से दंत रोग मे आराम होता है.
तुलसी के रस को हल्के
गर्म गुनगुने पानी मे मिलाकर कुल्ला करने से कंठ के रोगो मे लाभ होता है.
नामर्दी: धातु दुर्बलता मे तुलसी
के बीज 1 ग्राम या दूध के साथ सुबह-शाम सेवन करनेसे लाभ होता है.
सफेद दाग: तुलसी का रस 1 ग्राम
नींबू का रस 1 ग्राम कंसौदी पत्र का रस 1 ग्राम तीनों को बराबर –बराबर लेकर एक
तांबे के बरतन मे डालकर 24 घंटे के लिये सूरज कि रोशनी मे रख दे. गाढा हो जानेके
बाद इसका लेप लगाये रोग मे लाभ होगा तथा चेहरे के दाग तथा अन्य विकार भी दुर हो
जायेगा.
कफ: तुलसी के पत्तो को पानी मे पकाकर जब आधा जल शेष
रहा जाये तब जल को छानकर चुटकीभर सैधा नमक मिलाकर गुनगुना पानी से कुल्ला करने से
लाभ होता है.
कुष्ट रोग: कुष्ट रोग मे तुलसी के रस
का 10 से 20 ग्राम रोज प्रात:काल सेवन करने से लाभ होता है.
तुलसी के पत्तो को नीबू
के रस मे पीसकर दाद तथा कुष्ट रोग पर लेप करने से लाभ होता है.
तुलसी के 3 से 5 पत्ते
प्रतिदिन पानी के साथ लेने से दिमाक तेज होता है.
तुलसी का तेल नाक मे
डालने से, पुराना सिर दर्द तथा
अन्य रोग दुर होते है.
तुलसी के तेल सिर मे लगने
से सिर के जुएं लीखें मर जाती है.
तुलसी का तेल मुँह पर
मलने से चेहरा साफ होता होता है.



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