आम के फायदे
आम....यह ग्रीष्म जलवायु
का वृक्ष है, सम्पूण भारत में इसके
वृक्ष लगाये जाते है, और फलते फूलते भी है.आम
के अनेक किस्में पाई जाती है. जो पौधे गुठली बोकर लगाये जाते है. इसे कलम कर के भी
लगाया जाता है जिसे कलमी आम कहते है.
इसके अतिरिक्त हर जगह के आम
अलग अलग होते है, देशी आम में रेशा होने
से इसका रस पतला होता है,चूसकर खाने के काम मे आता
है, परंतु कलमी आम मे फल का
गूदा अधिक होता है अत: काटकर खाया जाता है
औषधि प्रयोग हेतु कलमी की अपेक्षा चूसने वाले आम ज्यादा गुणकारी होते है.
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इसमे विटामिन ए, बी और सी प्रचुर मात्रा मे पाये जाते है.
इसके प्रयोग
खांसी: पके हुये अच्छे आम को आग में भून कर ठंडा होने
पर धीरे धीरे चूसने से खांसी ठिक होती है.
हैजा: हैजे की शुरुआती अवस्था मे 20 ग्राम आम के
पत्तो को कुचल कर आधा किलो पानी पकये शेष रहने पर रोगी जल छानकर गर्म पिलाने से
लाभ होता है.
मधुमेह: आम के छाया मे सुखाये हुये 1-1- ग्राम पत्तो को आधा किलो जल मे पकये चौथाई
जल शेष रहने पर प्रात; सायं पिलाने से कुछ हि दिनों मे
मधुमेह दुर हो जाता है.
योनिरोग: आम के फूल छाल और पत्तों को पानी मे पीस बत्ती बना कर योनि में धारण करने
से गर्भाशय द्वरा होने वाले स्राव तथा योनि की दुर्गंध मे लाभ होता है.
आम के सूखी गुठली का चुर्ण प्रात;-सांय 6 या 7 ग्राम को दूध के साथ सेवन करने से तथा योनि में धारण करनेसे
योनिरोग मे लाभ होता है.
दाद खुजली रोग: आम को तोडते समय आमफल की पीठ मे जो गोंदयुक्त रस निकलाती है उसे दाद पर
खुजलाकर लगा देने से फौरन छाला पड जाता है, और फूटकर पानी
निकल जाता है. 2-3 बार लगाने से इस रोग मे आराम मिलता है.
फायदे आम के
फोडो पर: आम वृक्ष का गोंद थोडा गरम
कर लगाने से फोडा पूरा पककर फूटकर बह जाता है और घाव आसानी से ठिक हो जाता है.
मकडी का विष: गुठली को पीसकर लगाने से
अथवा अमचूर को पानी मे पीसकर लगाने से आराम होता है.
आम के फूलों का नस्य लेना
नकसीर मे लाभदायक है.
फल की छाल व पत्तो को
समभाग पीसकर मुख मे धारण करने से दांत व मसूडे मजबूत होते है.
नरम टहनी के पत्तो को
पीसकर लगाने से बाल बडे व काले होते है.
आम के गोंद को बिवाई पर
लगाने से लाभ होता है.
इस काम से सावधान-
आम के कच्चे फलों को अधिक
खानेसे विषमज्वर नेत्ररोग होता है.
आम सेवन के बाद दूध पीना
चाहिये, जल नही पीना चाहिये.
यकृत और जलोदर के रोगी को
आम नही खाने चाहिये.



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